रहस्य (1)
मैंने
मिलाई उसकी हाँ में हाँ
किया
समर्थन
उसकी
हर बात
का-
हिलाया
सर
सहमति का
हर बार-
अब
चुप्पी तो छानी ही थी
रहस्य (2)
आते ही
बीच में सबके
बदल जाते
हे चेहरे सबके
देखने
लगते है सब,शक्ल
एक दूसरे
की......
सामने
वालों को आईना जो समझते है
और आईना
तो दिखाता नहीं कभी शक्ल
बदलकर
Bahut he ashi kavitayein hain Kailash ji. सामने वालों को आईना dikhati hain.
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